एक बार जंगल में एक बाँस का पौधा और एक बरगद का पेड़ पास-पास उग रहे थे।
बरगद घमंड से बोला —
“देखो, मैं कितना बड़ा और मजबूत हूँ!
लोग मेरी छाया में बैठते हैं, पर तुम्हें तो कोई देखता भी नहीं।”
बाँस चुप रहा।
वह हर दिन बस थोड़ा-थोड़ा झुकता और बढ़ता रहा।
कुछ महीनों बाद भयंकर तूफ़ान आया।
आसमान काला, हवाएँ तेज़ —
बरगद सीधा खड़ा रहा, क्योंकि उसे अपनी ताकत पर घमंड था।
लेकिन बाँस हवा के साथ झुकता गया…
कभी दाएँ, कभी बाएँ — पर टूटा नहीं।
सुबह जब तूफ़ान थमा,
बरगद ज़मीन पर गिरा पड़ा था,
और बाँस अब भी सीधा खड़ा था।
बाँस ने धीरे से कहा —
“मजबूत वो नहीं होता जो कभी झुके नहीं,
मजबूत वो होता है जो टूटे बिना झुकना जानता है।”
शिक्षा:
- अहंकार ताकत को कमजोर बना देता है।
- लचीलापन ही असली शक्ति है।
- जो परिस्थितियों के साथ ढलता है, वही टिकता है।