एक बार की बात है, दो मेंढक एक खेत में कूदते-फाँदते घूम रहे थे।
मज़े-मज़े में वे एक गहरे गड्ढे में गिर गए।
गड्ढा बहुत गहरा था।
ऊपर खड़े बाकी मेंढक ज़ोर-ज़ोर से बोले —
“अब तुम दोनों बाहर नहीं निकल सकते, यहाँ से निकलना नामुमकिन है!”
पहला मेंढक उनकी बात सुनकर डर गया।
उसने कोशिश की, पर थोड़ी देर बाद हार मान ली।
वह बोला — “शायद सच में अब मेरा अंत आ गया।”
और वह वहीं बैठ गया… धीरे-धीरे थक कर मर गया।
लेकिन दूसरा मेंढक बार-बार छलाँग लगाता रहा।
हर बार गिरता, चोट लगती, फिर भी उठकर कोशिश करता।
ऊपर के मेंढक चिल्लाते रहे — “रुको! कोशिश मत करो, मर जाओगे!”
पर वह मेंढक सुनता ही नहीं था।
वह अपनी पूरी ताकत लगाता रहा, और आखिरकार एक बड़ी छलाँग लगाकर गड्ढे से बाहर निकल आया!
सारे मेंढक हैरान थे।
उन्होंने पूछा — “तू हमारी बात सुन क्यों नहीं रहा था?”
वह मुस्कराया और बोला —
“दोस्तों, मैं बहिरा (deaf) हूँ।
मैं समझा कि तुम सब मुझे हौसला दे रहे हो, इसलिए मैं लगातार कोशिश करता रहा।”
शिक्षा:
जीवन में बहुत बार लोग कहेंगे — “तुमसे नहीं होगा”, “यह असंभव है”, “रहने दो”…
पर याद रखना —
अगर तुम खुद पर भरोसा रखो, और कोशिश जारी रखो,
तो कोई गड्ढा इतना गहरा नहीं होता कि तुम उससे बाहर न निकल सको।
कभी-कभी लोगों की नकारात्मक बातों को न सुनना ही सबसे बड़ी ताकत होती है।
सच्ची सफलता उसी की होती है जो हार नहीं मानता।