प्रेरक प्रसंग: “शीशे का टुकड़ा और सूरज की किरण”

एक छोटे से गाँव में अनय नाम का लड़का रहता था।
वह बहुत गरीब था, लेकिन सपना बड़ा था — “मैं कुछ ऐसा करूँ कि लोग मुझे याद रखें।”
एक दिन स्कूल जाते समय उसे रास्ते में टूटा हुआ शीशे का टुकड़ा मिला।
वह बेकार लग रहा था, फिर भी अनय ने उसे उठा लिया और जेब में रख लिया।

अगले दिन दोपहर में जब सूरज की किरणें तेज़ थीं, अनय ने देखा कि उस शीशे से दीवार पर चमक पड़ रही है।
उसे एक विचार आया — उसने शीशे को थोड़ा झुकाकर उस रोशनी को अंधेरे कमरे की दीवार पर डाला, जहाँ बच्चे पढ़ नहीं पा रहे थे।
धीरे-धीरे उस छोटी सी किरण से पूरा कोना रोशन हो गया!

वह रोज़ नया प्रयोग करने लगा — कभी उस रोशनी से अक्षर दिखाता, कभी छोटे पौधे को सूर्य की किरणें देता।
लोग हँसते थे — “यह क्या कर रहा है?”
पर कुछ महीने बाद जब स्कूल की प्रदर्शनी हुई, अनय ने उसी शीशे से सूर्य की ऊर्जा पर छोटा प्रयोग दिखाया —
“छोटा शीशा भी, सही दिशा में हो, तो सूरज की रोशनी को बढ़ा सकता है।”

सभी शिक्षक उसकी समझ और सकारात्मक सोच देखकर दंग रह गए।
अनय ने कहा —
“मैंने सीखा कि हर चीज़ बेकार नहीं होती, बस उसे सही दिशा चाहिए…
जैसे कि इंसान को भी!”


शिक्षा:

  • मूल्य वस्तु में नहीं, दृष्टिकोण में होता है।
  • छोटी चीज़ें भी बड़ी रोशनी ला सकती हैं।
  • जिसने सोचना सीख लिया, उसने जीतना भी सीख लिया।

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