परिचय:
गणित में संख्याओं को एक विशेष क्रम में रखना अक्सर बहुत उपयोगी होता है। ऐसी ही एक महत्वपूर्ण श्रेणी है समांतर श्रेणी।
समांतर श्रेणी वह संख्याओं का क्रम होता है जिसमें किसी भी दो लगातार पदों का अंतर समान होता है। इस अंतर को सामान्य अंतर (common difference, d) कहते हैं।
उदाहरण:
2, 5, 8, 11, 14, …
यह एक समांतर श्रेणी है क्योंकि प्रत्येक दो लगातार संख्याओं का अंतर 3 है। यहाँ 3 सामान्य अंतर (d) है।
सामान्य रूप:
यदि किसी समांतर श्रेणी का पहला पद a है और सामान्य अंतर d है, तो इसके पद इस प्रकार लिखे जा सकते हैं:
a, a + d, a + 2d, a + 3d, ...
किसी भी पद का सूत्र:
किसी समांतर श्रेणी में n-वाँ पद aₙ निकालने का सूत्र है:
aₙ = a + (n − 1) × d
उदाहरण:
यदि पहला पद a = 3 और सामान्य अंतर d = 4 है, तो पाँचवाँ पद a₅ होगा:
a₅ = 3 + (5 − 1) × 4 = 3 + 16 = 19
समांतर श्रेणी का योग (Sum of n terms):
किसी समांतर श्रेणी के पहले n पदों का योग Sₙ निकालने का सूत्र है:
Sₙ = n/2 × [2a + (n − 1)d]
या
Sₙ = n/2 × (a + l)
जहाँ l अंतिम पद है।
उदाहरण:
समांतर श्रेणी: 2, 5, 8, 11, …
पहला पद a = 2, सामान्य अंतर d = 3, और n = 6
S₆ = 6/2 × [2 × 2 + (6 − 1) × 3]
= 3 × [4 + 15]
= 3 × 19
= 57
महत्व और उपयोग:
समांतर श्रेणी गणित में बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि इसका उपयोग जीवन के कई क्षेत्रों में होता है:
बैंक में ब्याज की गणना
निर्माण कार्य में सामग्री की मात्रा निकालना
खेलों में स्कोर या दूरी के पैटर्न
विज्ञान में किसी नियत अंतर के क्रम को समझने के लिए
निष्कर्ष:
समांतर श्रेणी (AP) एक सरल लेकिन शक्तिशाली गणितीय अवधारणा है। इसे समझकर हम न केवल गणितीय समस्याओं को आसानी से हल कर सकते हैं, बल्कि जीवन में होने वाले पैटर्न और अनुक्रमों को भी बेहतर तरीके से समझ सकते हैं।