मनीष एक छोटे गाँव का 10वीं कक्षा का छात्र था। उसका गाँव पहाड़ों और छोटे खेतों से घिरा था, और वहाँ ज़्यादातर बच्चे पढ़ाई छोड़कर घर के काम में मदद करते थे। लेकिन मनीष के मन में बड़े सपने थे — वह एक दिन अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक बनना चाहता था।
मनीष के पास अच्छे किताबें या लैपटॉप नहीं थे। उसका बैग फटा हुआ था और उसके जूते भी पुराने थे। गाँव के कुछ दोस्त उसका मज़ाक उड़ाते —
“अरे मनीष, इतनी गरीबी में वैज्ञानिक कैसे बनेगा?”
मनीष चुप रहता। उसका विश्वास इतना मजबूत था कि वह जानता था — परिस्थितियाँ कुछ भी हों, मेहनत और हिम्मत से सब संभव है।
रोज़ सुबह सूरज निकलने से पहले वह नदी किनारे जाता और विज्ञान के प्रयोग करता। कभी पानी में बूँदों से इन्द्रधनुष बनाता, कभी मिट्टी से छोटे-छोटे मॉडल तैयार करता।
शाम को स्कूल जाकर भी वह ध्यान से पढ़ता। धीरे-धीरे उसके मेहनत का रंग आने लगा — वह कक्षा में टॉप करने लगा।
एक दिन स्कूल में विज्ञान प्रतियोगिता हुई। मनीष ने अपने खुद बनाए हुए छोटे पवनचक्की मॉडल का प्रेज़ेंटेशन दिया। सब बच्चे और शिक्षक दंग रह गए। मनीष ने मॉडल को समझाया और कहा,
“यह छोटा सा मॉडल दिखाता है कि कैसे हम ऊर्जा बचा सकते हैं और पर्यावरण की रक्षा कर सकते हैं।”
अंत में, जज ने उसे पहला पुरस्कार दिया। मनीष ने मुस्कराकर कहा,
“सपने बड़े हों, पर उन्हें पाने के लिए कदम छोटे और लगातार होने चाहिए।”
इस घटना के बाद गाँव के बच्चे भी प्रेरित हुए। कई बच्चे मनीष के पास आए और पूछा,
“हम भी कुछ बड़ा करना चाहते हैं, लेकिन हमारे पास संसाधन नहीं हैं।”
मनीष ने हँसकर कहा,
“संसाधन हमारे हाथ में नहीं हैं, लेकिन मेहनत और इरादा हमारे हाथ में है। वही असली शक्ति है।”
मनीष की यह कहानी धीरे-धीरे पूरे जिले में फैल गई। उसने साबित कर दिया कि गरीबी और मुश्किलें सपनों का रास्ता नहीं रोक सकतीं, बस हिम्मत और मेहनत का जादू चाहिए।
सीख:
सपने देखना आसान है, उन्हें सच करना मुश्किल लगता है।
लेकिन यदि आप हर दिन थोड़ा कदम बढ़ाते रहें, हार न मानें, और अपने इरादे मजबूत रखें, तो कोई भी बाधा आपको रोक नहीं सकती।
आपके अंदर की मेहनत ही आपके सपनों की उड़ान है।