सारा नाम की एक लड़की अपने गाँव के सरकारी स्कूल में पढ़ती थी। गाँव के ज्यादातर लोग खेती-बाड़ी में व्यस्त थे और पढ़ाई को ज्यादा महत्व नहीं देते थे।
सारा अपनी कक्षा में सबसे होशियार थी, लेकिन उसके पास अच्छे नोटबुक्स और किताबें नहीं थीं। कई बार उसकी कॉपियों के पन्ने फट जाते, और बच्चों का मज़ाक बनती।
एक दिन स्कूल में विज्ञान का टेस्ट हुआ।
सारा ने पूरी मेहनत की थी, लेकिन उसे डर था — उसकी पेंसिल टूट गई थी और नोटबुक के पन्नों पर दाग थे। उसने सोचा,
“अब तो रिज़ल्ट अच्छा नहीं आएगा।”
टेस्ट के दिन टीचर ने कहा,
“जो सबसे अच्छे प्रयोग और सही उत्तर देगा, वही हमारी क्लास का स्टार होगा।”
सारा ने अपनी टूटी पेंसिल और पुरानी किताबों के साथ भी शांत रहकर उत्तर लिखे।
जब परिणाम आया, सबको हैरानी हुई — सारा ने कक्षा में पहला स्थान प्राप्त किया।
टीचर ने पूछा,
“सारा, इतने सीमित संसाधनों में तुमने ऐसा कैसे किया?”
सारा मुस्कराकर बोली,
“टीचर, किताबें और पेंसिल केवल सहारा हैं। असली चीज है मेहनत और हौसला, वही जीत दिलाती है। मैंने कभी हार नहीं मानी।”
सारा की यह बात सुनकर पूरे गाँव के बच्चों के मन में बदलाव आया।
वे अब अपनी पुरानी किताबों और साधनों के बावजूद सीखने लगे।
सारा ने साबित कर दिया कि संसाधन सीमित हो सकते हैं, पर सपनों की उड़ान और मेहनत की कोई सीमा नहीं होती।
अगले साल, सारा ने जिले की विज्ञान प्रतियोगिता में भी पुरस्कार जीता और उसके गाँव के बच्चों को भी प्रेरणा मिली कि मुश्किलें सिर्फ हमारे हौसले की परीक्षा होती हैं, हार कभी नहीं।
सीख:
सपनों और मेहनत में संसाधनों की कमी कभी बाधा नहीं होती।
जो लगातार कोशिश करता है और कभी हार नहीं मानता, वही सच्ची सफलता पाता है।
“टूटी चीजें” हमारे रास्ते में नहीं रुकावट हैं, बल्कि हमें मजबूत बनाती हैं।